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Sunday, March 4, 2012

यादों का गुच्छा


:-)""-:माझीया प्रियाला प्रित कळेना Mazhiya Priyala Prit Kalena:-""(-:

































मेरी यादों का गुच्छा

तूने फिर से गुमा दिया है
फिर बनवाओगे कहाँ
तुम वैसा दूजा?
मैंने बस इतना पूछा
वही यादों का गुच्छा
मेरी यादों का गुच्छा


मेरी यादों का गुच्छा
था इकलौता एक अदद
जरा दिल से तो ढूंढो
ले लो यारों से भी मदद


मेरी यादों का गुच्छा
होगा रद्दी में गुज़रे सालों की
या कलाई थामे होगा
तेरी कंघी से टूटे बालों की


मेरी यादों का गुच्छा
उस रौशनी में चमकेगा
जो बहती थी गालों से तेरे
मेरी यादों का गुच्छा
उस हंसी के संग खनकेगा
जो तेरे होठों के लेती थी फेरे


मेरी यादों का गुच्छा
मिलेगा वहीँ कहीं
तकिये के तले होगी शायद
अब भी उसकी नमी
या देखो ज़रा उठा के
उन शरारतों का पोंछा
वहां ढूँढने का सोचा?
वही यादों का गुच्छा
मेरी यादों का गुच्छा


मेरी यादों के गुच्छे में
ना सोना-चांदी ताम्बा है
बस फौलाद से ढला है
उम्मीदों संग बाँधा है


मेरी यादों का गुच्छा
सहमा सा कहीं पड़ा है
नयी यादों से
तो वो लड़ लेगा
उसे बस ज़ंग लगने का
डर ज़रा है…

Friday, January 20, 2012

याद बहुत आता है


यादों ने आज’
यादों ने आज फिर मेरा दामन भिगो दिया
दिल का कुसूर था मगर आँखों ने रो दिया
मुझको नसीब था कभी सोहबत का सिलसिला
लेकिन मेरा नसीब कि उसको भी खो दिया
उनकी निगाह की कभी बारिश जो हो गई
मन में जमी जो मैल थी उसको भी धो दिया
गुल की तलाश में कभी गुलशन में जब गया
खुशबू ने मेरे पाँव में काँटा चुभो दिया
सोचा कि नाव है तो फिर मँझधार कुछ नहीं
लेकिन समय की मार ने मुझको डुबो दिया
दोस्तों वफ़ा के नाम पर अरमाँ जो लुट गए
मुझको सुकून है मगर लोगों ने रो दिया

मुझे तुझसे है क्या मिला


आदतन मैं हंसता रहा कभी किया न कोई गिला
तू ही बता ऐ जिन्दगी मुझे तुझसे है क्या मिला


कितने हंसी कितने जंवा खडे हुये थे हर मोड पर
तेरी नवाजिशों का असर न मिला मुझे वफ़ा का सिला


कितने मौसम गुजर गये इक खुशी के इन्तजार में
भेज दी तूने खिजां जब दश्ते-दिल में एक गुल खिला


राहे-सफ़र में मुसलसिल मुसाफ़िरों की भारी भीड थी
जाने फ़िर भी क्यूं लुटा सिर्फ़ मेरे प्यार का ही काफ़िला


अजनवी सा क्यों आज है जो दोस्ती का दम भरता रहा
गनीमत है कह कर नही तोडा उसने दोस्ती का सिलसिला


आदतन मैं हंसता रहा कभी किया न कोई गिला
तू ही बता ऐ जिन्दगी मुझे तुझसे है क्या मिला

ये समंदर भी कितना पास है … फिर भी दो बूँद की प्यास है .


ये समंदर भी कितना पास है …
फिर भी दो बूँद की प्यास है .
आसमां मिल जाए इस जमीं से …
आज भी इस बात की आस है.
नहीं पड़ता है फर्क तुझे …
पर इसी बात से तो तू ख़ास है.
मत कर बात और ना देख मुझे …
पर रहेगी तू हरपल मेरे पास है.
मुस्कुराता तो मै अब भी हूँ …
बस लोग कहते मुझे जिन्दा लाश हैं.
झनझनाती तेरी मुस्कराहट आज भी है …
जो हर मजबूर की ख़ुशी में तेरा वास है.
मुसीबतों से भागता हूँ नहीं मै अब …
क्यूंकि तेरी यादों का साथ मेरे पास है.
गर जान लिया होता मैंने जो पहले तुमको
तो ना कहता जिन्दगी भर बस ये “काश” है.




हर अल्फाज की वजह बस तू है …
इस दिल की धड़कन की सुर ताल भी तू है .
हर पल तुझे पाने के ख्वाब में खोया हूँ …
क्यूंकि मेरे वजूद की वजह तू है.
तुझसे अलग कैसे जियूं मै ,
क्यूंकि दिल के कोने में कहीं बैठा शख्स भी तू है .










सिहरन की इस सर्दी में …


तेरी यादें एक गर्माहट का अहसास दे जाती है .


मुश्किलें क्योँ ना कितनी ही हो …


तेरी मुस्कराहट उनसे लड़ने को हौसला दे जाती है .


जब जीना लगने लगे मुश्किल …


तेरी आँखें 1 नयी जिन्दगी दे जाती है .


प्यार ना कह इसे बदनाम करो …


ये तो मुझे ”कैसे जियें” सिखलाती नज़र आती है …










गर मेरी एक झूठी तारीफ ला दे तेरे चेहरे पे मुस्कराहट …
तो खुदा कसम सारी जिन्दगी इन्ही झूठों के बीच गुजार दूं .
कम लगे अगर तुझको ये भी …
तो सारे likes, super likes, awesome तेरे facebook profile पे सजा दूं.










जमाने भर की खुशियाँ देनी चाही तुझे …
पर कब तू दिल तोड़ गया, मालूम ना चला.
आज ये दिल जल रहा है तेरी हर मुस्कराहट की याद में ,
दुनिया पड़ रही है इसे और जालिम तुझे पता भी ना चला.










दिन भर करता हूँ बातें तुमसे,चेहरे पर हंसी रहती है
पर यकीं मान,इक ख़ामोशी मेरे दिल में भी पलती है


यूँ तो है हर पल तू मेरे साथ …
पर इस दिल में आके कभी, इक तन्हाई भी मिलती है


तू गर समझे है कि तुझे है दुःख मुझसे ना मिल पाने का कभी
कभी आके देख दिल में मेरे, जुदाई की आग यहाँ भी जलती है !!!










चाहूँ मै तुझे कितना , ये मै बता नहीं सकता ,
मै तेरे लिए क्या हूँ , ये मै जान नहीं सकता .
क्यों सी कर बैठी है होठों को तू ,
मेरा इन्तेजार मत कर , मै इतनी हिम्मत जुटा नहीं सकता ,
लोग चाहे कुछ भी कहे ,
पर तुने मुझे ऐसे ही अपनाया ,
जीत लिया दिल तूने , इस बात को मै झुठला नहीं सकता ,
तू जो ना कहे , वो तेरी आँखे कह जाये ,
पर हूँ मै बदकिस्मत इतना कि वो मै सुन नहीं सकता ,
तेरे लिए कर जाऊं मै कुछ भी ,
बस जान नहीं माँगना , ये मै दे नहीं सकता ,
जीना है जब तेरे ही साथ , तो कैसे दूँ ये जान तुझे ,
सब कुछ तो है तेरा , पर मै कुछ मांग नहीं सकता .
मिल सकता नहीं तुझसे , तो कविता ही लिख देता हूँ ,
पर अब और नहीं , इतना इन्तेजार मै कर नहीं सकता ,
गर जो मिली होती पहले मुझे , मै आज कहाँ होता ,
दूर हो कर भी , दूरियों का अहसास मै कर नहीं सकता .
कुछ तो ख़ास है तुझमे ऐसा , कि ये lines खुद बा खुद बन जाती है ,
बेवजह बेसबब मेरे दिलो दिमाग पर छा जाती है .
मत कर तू और पागल मुझे , मुझे ऐसे ही जीने दे ,
क्योकि तू ना मिली अगर मुझको , तो फिर मै जी नहीं सकता .










जब भी होता हूँ तनहा , अतीत में लौट जाने को मन करता है ,
1 बार फिर बचपन में जाने को दिल करता है .
साँसों कि तपिश जब छूती है इस दिल को, तो खुद को आंसुओं में भिगोने का मन करता है …
1 बार फिर बचपन में जाने को दिल करता है .










तू ही था जिस पर मै हंसा था कभी …


तू ही था जिसका दिल दुखाता था मैं कभी …
फिर बदला समय का पहिया ,
अब बारी तेरी है …
हँसाता भी अब तू ही है मुझे कभी …
रुलाता भी अब तू ही है मुझे अभी !!!










आज भी याद आती है क्यों वो ,
भुलाने पर भी भूल पाती नहीं वो ,
हँसता तो हूँ मै इस दुनिया को दिखाने के लिए,
पर हर हंसी के पीछे का दर्द जानती नहीं वो !
जिन्दगी क्यूँ यूँ दो राहे पे लाके खड़ा कर देती है ,
जब मंजिल ही कदम बढाने से रोक लेती है .
देना ही था गर हौसला मंजिल पाने का ,
तो क्यूँ तू अब मझदार में छोड़ देती है ???
माना कि हममे नहीं वो जज्बा ,
कि चाँद छू पाएं ,
पर ऐसा भी क्या खफा होना ,
कि आप चाँद देखने पे भी बंदिशें लगा देती है !!!














नफरत तो हो गयी मुझे खुद से …
जब मैंने जाना मेरी मोहब्बत की कदर क्या है …
आज भी कोसता हूँ उस लम्हे को …
जब सोचा था की दोस्ती करने में हर्ज़ ही क्या है !!!


मेरे हर अल्फाज की वजह भी वही थी …
जब निकला था आंसू पहली बार इन आँखों से …
तब भी वजह तू ही थी .
छोड़ दी थी दुनिया मैंने पाने को तुझे …
पर फिर क्यों ऐसा हुआ की …
…इस बार भी सिसकने की आवाज मेरी ही थी !!!
है ये कहानी एक आस पास की …
१ लड़का-ऐ-आम और लड़की ख़ास की.
लड़का कहलाता पहले ये ठरकी था …
हँसता तो था पर फिर भी सनकी था .
लड़की नाजों में पली थी .
सही मायनों में वो एक परी थी.
लड़का ना जानता था इस बात को …
हलके में ही लेता था इस ख़ास को.
एक रात कुछ ऐसा हुआ …
हमेशा दोस्त रहने का एक वादा हुआ .
लड़के को उस परी को जानने का मौका मिला …
तबसे उस “ठरकी” का चेहरा खिला .
असल जिन्दगी के मायने उसने उस परी से सीखे …
फिर कई कवितायेँ उसने उस परी को लिखे.
पड़कर lines परी बोली ये तो copy paste है .
सुनकर बात ये लड़के के दिल को हुआ ना था rest है .
समय बीता … लड़के पर चाहत का खुमार चड़ा …
धीरे धीरे प्यार के आसमानों में स्वछन्द उड़ा .
चाहतें लड़के की हिलोरें मार रही थी …
उधर परी उसे “just friend” के tag में बाँध रही थी .
जिस परी को चाहा था उसने दिल से …
उसका दिल तो बंधा था किसी और की डोर से .
लड़का वो आ गया था घुटनों पे …
बस दिल में उसके एक ही बात थी …
ना जाये छोड़ के उसको उसको परी …
पर उस परी को उसके जज्बातों की ना कदर थी .
दिल टूटा जो उस लड़के का …
तो ना जुड़ पाया कभी …
सीखा वो बस एक इतनी सी बात …
अब प्यार नहीं करना है कभी .








रिवाजें निभाने का वक़्त आ गया है…


तुम्हे भूल जाने का वक्त आ गया है.
तेरी बदली नजरों से आहत है ये दिल…
कि फ़िर मुस्कुराने का वक्त आ गया है.
शहर भर में फैलीं है अपनी कहानी..
अब नजरें चुराने का वक्त आ गया है…
तेरा जाना तय था,सो ये ही हुआ भी…
कि एक और जख्म खाने का वक्त आ गया है

मेरे पास बस प्यार है’


प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ
माँगने उसकी माँ के पास पहुँचा 
तब वह गुस्से में बोली
‘तुम्हारे पास क्या है 
गाड़ी, बंगला या बैंक बेलेंस 
प्रेमी फिल्मी स्टाइल में बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका की माँ भड़क गयी गयी
और चिल्लाकर बोली 
‘उसका क्या मेरी बेटी अचार डालेगी 
यह कमाकर तुम्हें पालेगी 
यह हर महीने नया सूट खरीद कर लाती है 
तुम्हें जिस मोबाइल से करती है फोन
उसमे सिम बाप के पैसे से डलवाती है
तुम इसके खर्च उठा सकोगे
क्या है तुम्हारे पास 
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’


प्रेमिका अपनी माँ से नाराज होकर बोली 
‘मम्मी तुम मेरी इसके साथ 
शादी कराने पर राजी हो जाओ 
नहीं तो में अपनी जान दे दूँगी या
इसके साथ भाग जाऊंगी ‘
माँ खुश होकर बोली
‘बेटी इसमें पूछना क्या 
कल को भागती है
आज ही भाग जा 
बाकी मैं संभाल लूँगी’
वह अपने कमरे से 
अपना सामान उठाकर ले आई
और प्रेमी से बोली
‘चलो अब यहाँ से निकलते हैं
कहीं और बसते हैं’
‘ठीक है कुछ पैसे भी रख लेना
तुम्हारे प्यार में पिताजी के दिये 
सब पैसे तुम पर खर्च का दिया
अब जो बचा
मेरे पास बस प्यार है’

वो लडकी पागल सी





किस पर यकीं करूं, मुझे
हर बात हकीकत लगती है
वो लडकी मुझको पागल सी


मेरी मोहब्‍बत लगती है


कुछ लोग उसे कहते हैं कातिल
कुछ जहां से बेगाना
इस शहर में मुझको सबसे
उसकी अदावत लगती है




वो चांद नहीं है, फूल नहीं है
नहीं-नहीं कुछ और है वो
जब जब घर से निकले वो
फिर एक कयामत लगती है




वो न कहे तो न कहे, पर
मुझको ये भी मालूम है
झुकी झुकी सी नजरों में
बस मेरी चाहत लगती है। 




आइए, मेरी बनके खुशी आइए


आइए, मेरी बनके खुशी,  आइए
मैं करूं आपकी बंदगी, आइए
आप खुद को न मुझसे जुदा होने दें
ख्‍वाबों की बज्‍म है सजी, आइए


है अंधेरा बहुत मेरे घर में सुनो
बन के आप शमां-रोशनी, आइए
मैं करूं इंतजार और कितना अभी
आना है तो क्‍यों न अभी आइए


मैं हूं आपका, गर है कोई शक
नाम की आपके जिंदगी आइए
हर लम्‍हा रहे बस साथ आपका
ऐसी होके कभी मेरी आइए




मैं  




गिरता हूं, उठता हूं फिर चल पडता हूं मैं
जाने किसकी तलाश में निकल पडता हूं मैं।
मेरे दिल में जुनून है और ख्‍वाब चश्‍म में
हर ठोकर पर और भी संभल पडता हूं मैं।।


न जाने कितनी मंजिलें पा चुका हूं मैं
एक और नई मंजिल पर आ चुका हूं मैं।
ये तश्‍नगी मेरी क्‍यों बुझना नहीं चाहती
ये रफतार मेरी क्‍यों रुकना नहीं चाहती।।


क्‍यों रुकूं मैं जब, सब रफतार में यहां
मेरे बाद और भी कई कतार में यहां।
मैं बढूंगा, लोग बढेंगे, परिवेश बढेगा
मेरा गांव, मेरे लोग, मेरा देश बढेगा।।

Monday, January 16, 2012

♥ यह शब्द नही भावना है, ज़रा महसूस करके देखो!♥

scraps






गुनगुना रही है

तन्हाई मेरी
बादलो सी रुसवाई मेरी
मोती सरक रहे है
दरिया है
आँखें मेरी
उलझ रही है
चरखी कही
कोयल गा रही है
गुमनाम गीत कोई
दिल मेरा जैसे
निराश हिमानी
सिर चड़ी है
दीवनदी तेरी
उदासी का आँचल
ओढ़े कोने में कही
कालिका लुप्त हुई

 








हाल न पूछो मेरे, मैं खो चुकी हूँ
सूरज है रोशनी है, मैं यही कही हूँ|

हवाएँ है हरियाली है, मैं लापता हूँ
चाँद है तारे है, मैं एक साया हूँ|

हूँ तो यही कही, कही खो गई हूँ
शोर है आवाज़ें है, मैं शांत बैठी हूँ|

हाल ना पूछो मेरे, मैं गुमशुदा हूँ
हाल ना पूछो मेरे, मैं ज़िंदा हूँ||

***

Haal na poocho mere, main kho chuki hun
Suraj hai roshni hai, main yahi kahi hun|

Hawayen hai hariyali hai, main lapata hun
Chand hai tare hai, main ek saya hun|

Hun to yahi kahi, kahi kho gai hun
Shor hai aawazen hai, main shant baithi hun|

Haal na poocho mere, main gumshuda hun
Haal na poocho mere, main zinda hun||



scrap for orkut























ए बेवफा!
तू याद रख
यही दीवानगी
थी कल तक
तू झुठला रही है
मैं जाता रही हूँ
नाराज़गी है
मुझमे भी
कैसे भूलून
तेरे मीठे वादे
मोहब्बत के
वो इरादे
मैं खफा हूँ
तन्हा हूँ
मैं ज़िंदा हूँ
तू हर लम्हा
झुठला, ए बेवफा!

*****

E bewafa!

Tu yaad rakh

Yahi deewangi

Thi kal tak

Tu juthla rahi hai

Main jata rahi hun

Narazgi hai

Mujhme bhi

Kaise bhulun

Tere mithe wade

Mohabbat ke

Wo irrade

Main khafa hun

Tanha hun

Main zinda hun

Tu har lamha juthla

E bewafa!